सिर्फ वोटों से डरते हैं नेता

आशुतोष पाठक, डायरेक्टर न्यूज़

नई दिल्ली: मीडिया जिसको दीपावली पर प्रधानमंत्री का तोहफा बताने में लगी है. असल में वह जनता जनार्दन की ताकत है, जिसके सामने प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा है. अगर गुजरात चुनाव सामने ना होता तो डीजल और पेट्रोल पर दो रुपए की कमी भी नहीं हुई होती.

 

जिस जीएसटी को लेकर सरकार ढोल पीट रही थी, उसमें कितनी व्यवहारिक कठिनाइयां थी और कितना गैर-जिम्मेदाराना फैसला था. यह आइने की तरह साफ हो चुका है. हर महीने रिटर्न फाइल करना एक संपूर्ण विकसित देश के लिए तो संभव है. लेकिन भारत जैसे गरीब देश के लिए यह पूरी तरह से अव्यवहारिक है.

 

लोक नायक मार्ग में घुसते समय लगता है प्रधानमंत्री अचानक दिल्ली की चकाचौंध में फंस गए हैं. उन्हें यहां तक याद नहीं रहता है कि छोटे कस्बाई शहरों में जो व्यापारी व्यापार में लगे हैं. अगर इतने ही तकनीकी रुप से समृद्ध होते तो निश्चित रुप से व्यापार करने की जगह नौकरी कर रहे होते. क्योंकि हमारे देश का ताना-बाना कुछ ऐसा है जहां व्यापार की जगह नौकरी को लोक भविष्य की सुरक्षा की गारंटी मानते हैं.

Narendra Modi 3

 

खैर सरकार जनता की है और उसने जनता के दुख दर्द को समझा, यह जनतंत्र के लिए शुभ है. जनता ने फिर दिखाया कि फैसला अहंकार में ना लें. सोच समझकर लोकहित के फैसले ही सर्व स्वीकार्य होते हैं. आशा है कि प्रधानमंत्री अब और सजग होंगे.

मीडिया से हमारी गुजारिश है कि आप अपनी भूमिका में बने रहिए. ताकि प्रधानमंत्री हमारे लिए काम करते रहें.

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