‘प्रभु’ का प्रायश्चित करें मोदी

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आशुतोष पाठक, डायरेक्टर न्यूज़

नई दिल्ली: क्या मोदी जी आप बताएंगे प्रभु को रेल मंत्रालय से क्यों हटाया ? पार्टी के ट्रेजरार को रेल मंत्रालय सौंपने से क्या मौत थम गई ? क्या दुर्घटना बंद हो गई है ?

अब तो आम जनता भी यह बात पूछने लगी है कि बुलेट ट्रेन तो हमने मांगा ही नहीं था. बुलेट ट्रेन अगर आपकी निगाह में जरूरी है तो उससे प्रभु के तवादले को क्या लेना-देना. लोग अब यह जान गए हैं कि प्रभु ईमानदार थे. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के कमीशनखोरी में वो आसानी से शरीक नहीं हो सकते थे. इसलिए यह जिम्मेदारी पार्टी के पूर्व ट्रेजरार को सौंप दी गई.

 

प्रभु इफेक्टिव हैं या नहीं इस पर सवाल उठाए जा सकते हैं. लेकिन उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाना आम जनता भी नहीं चाहेगी. लोग तो पहले से भी यह जानते थे कि रेल दुर्घटना के लिए रेल मंत्री को सीधे जिम्मेदार ठहराना आधी सच्चाई होगी.

 

मोदी जी आपने एक बार पहले भी यह गलती की थी जब डॉक्टर हर्षवर्द्धन को हेल्थ मिनिस्ट्री से हटाया था. उस वक्त भी लोगों में यह संदेश गया था कि क्या आप ईमानदार छवि वाले को पसंद नहीं करते हैं. अब आप लाख कोशिश कर लीजिए प्रभु के तबादले के बाद लोगों को धीरे-धीरे विश्वास हो रहा है कि क्या आपने ईमानदारी का केजरीवाल की तरह ही चोला पहन रखा है.

 

अटल जी की सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा पर व्यक्तिगत सवाल उठाए जा सकते हैं लेकिन उनके द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब भी अवश्यंभावी हो गया है.

प्रधानमंत्री जी जिस इमेज को बनाने के लिए आप पंडित नेहरू से भी ज्यादा गंभीर दिखते हैं. वह सिर्फ प्रबंधन के सहारे नहीं बन सकता. आपको अपने कर्मों में भी ईमानदारी बरतनी पड़ेगी. यह सवाल आपके विरोधी का नहीं देश की चिंता करने वालों का है.

 

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